राग नाही तुझ्या नकाराचा
चीड आली तुझ्या बहाण्याची !
नवे गझललेखन
| शीर्षक | कवी | प्रकाशनाची तारीख |
|---|---|---|
| बोलण्याने बोलणे वाढेल आता | चित्तरंजन भट | 17 जून 2007 |
| आवश्यक ! | ज्ञानेश. | 13 मे 2011 |
| अनुमान! | प्रदीप कुलकर्णी | 1 डिसेंबर 2011 |
| येत नाही मी | अनिल रत्नाकर | 12 ऑक्टोबर 2011 |
| मी तुझा,तुझा असेन आमरण | कैलास | 21 जुलै 2011 |
| ...व्यवसाय मी | अनिल रत्नाकर | 9 ऑक्टोबर 2011 |
| किनारा गाठण्यासाठी | बेफिकीर | 9 ऑक्टोबर 2009 |
| असंभव | आनंदयात्री | 28 सप्टेंबर 2011 |
| कुठे लुप्त झाले फुले-भीम-बापू? | गंगाधर मुटे | 21 एप्रिल 2011 |
| बत्तीस तारखेला | गंगाधर मुटे | 21 सप्टेंबर 2011 |
| भिंती !! | supriya.jadhav7 | 18 मे 2011 |
| हुंदका ओठातला पोटात नाही | supriya.jadhav7 | 9 सप्टेंबर 2011 |
| मला सांभाळले आहे.. | ज्ञानेश. | 7 ऑगस्ट 2011 |
| अस्तित्व दान केले | गंगाधर मुटे | 6 सप्टेंबर 2011 |
| माहीत नाही... | जिज्ञासा... | 24 मे 2011 |
| छडा लागला रे | सुरेश शिरोडकर | 9 ऑक्टोबर 2010 |
| क्षण एक पुरे जगण्यास खरा | मयुरेश साने | 30 ऑगस्ट 2011 |
| माती | मिल्या | 1 जून 2010 |
| मजकूर | आनंदयात्री | 22 मे 2011 |
| फिरून यायचे इथे टळेल का कधी? | मिल्या | 16 ऑगस्ट 2011 |
| हे फुलांचे उधान झाडांना... | वैभव देशमुख | 16 ऑगस्ट 2011 |
| काळ | जयन्ता५२ | 22 ऑगस्ट 2011 |
| ''मागणे'' | कैलास | 18 ऑगस्ट 2011 |
| ''सरावाने'' | कैलास | 17 ऑगस्ट 2011 |
| मी कुठे शोधू अता ती ओळखीची माणसे | शाम | 16 ऑगस्ट 2011 |
