|
गझल |
जीवनाशी जुंपली |
rind |
|
गझल |
''तुझ्याविना या जगात माझा जगावयाला नकार आहे'' |
कैलास |
|
गझल |
तू कशी जाशील...? |
प्रदीप कुलकर्णी |
|
गझल |
रुतावे कुठे |
जयश्री अंबासकर |
|
गझल |
अज्ञातवास |
प्रदीप कुलकर्णी |
|
गझल |
नामानिराळे |
संतोष कसवणकर |
|
गझल |
सखे ठोठावते आहेस कुठले दार देहाचे? |
ॐकार |
|
गझल |
आयुष्यात रचेन एक कविता |
बेफिकीर |
|
गझल |
पुढे माणसांचे यशू-बुद्ध होते |
गंगाधर मुटे |
|
गझल |
सौदा |
शांडिल्य |
|
गझल |
व्यथा |
मिलिंद फणसे |
|
गझल |
नाचली काळीज ते पेलीत काही माणसे |
ह बा |
|
गझल |
कैकदा मेलोत आम्ही |
भूषण कटककर |
|
गझल |
तुझी आभाळपुण्याई तुकोबा |
वैभव वसंतराव कु... |
|
गझल |
रात आहे |
अनिकेत |
|
गझल |
'....राहू दे मला माझा !!' |
प्रदीप कुलकर्णी |
|
गझल |
मी जरा बोलायला गेलो कुठे |
निलेश कालुवाला |
|
गझल |
जुने, विसरून गेलेले... |
ज्ञानेश. |
|
गझल |
असे पाण्यामुळे गंगा |
अजय अनंत जोशी |
|
गझल |
बोलण्याने बोलणे वाढेल आता |
चित्तरंजन भट |
|
गझल |
गोचिडांची मौजमस्ती |
गंगाधर मुटे |
|
गझल |
तुलाही, मलाही... |
ज्ञानेश. |
|
गझल |
मौन |
अनिरुद्ध अभ्यंकर |
|
गझल |
भरावे शेत वात्सल्यात... |
अजय अनंत जोशी |
|
गझल |
भणंग १ |
चमत्कारी |