|
गझल |
प्रघात |
प्रदीप कुलकर्णी |
|
गझल |
शेवट लिहलेला असतो सुरुवातीवरती |
शाम |
|
गझल |
जेव्हा मेघ दाटुन येते(सुधारित)... |
गौतम.रा.खंडागळे |
|
गझल |
मदारी |
विसुनाना |
|
गझल |
श्वास झालो |
अनिल रत्नाकर |
|
गझल |
वेळ जावा लागतो... |
ज्ञानेश. |
|
गझल |
ध्वस्त झालो गाव सांगे पूर जेव्हा ओसरे |
कैलास गांधी |
|
गझल |
लटकून जन्म गेला |
भूषण कटककर |
|
गझल |
बंधन |
वर्षा ताम्बे |
|
गझल |
एक वेडी वेदनेची जात आहे. |
मानस६ |
|
गझल |
कसा मी करावा खुलासा मनाचा... |
विद्यानंद हाडके |
|
गझल |
मंत्र |
प्रशान्त वेलापुरे |
|
गझल |
तू ..... |
supriya.jadhav7 |
|
गझल |
भणंग २ |
चमत्कारी |
|
गझल |
वर्षे झाली |
योगेश वैद्य |
|
गझल |
मी एकटाच येथे माझ्या जगात आहे |
मी अभिजीत |
|
गझल |
हॉटेल पॅराडाइज, पुणे. दि. १९.०१.०९ रात्री ११.३० |
भूषण कटककर |
|
गझल |
लाजच काढली |
अनिल रत्नाकर |
|
गझल |
वाटले बरे किती! |
चित्तरंजन भट |
|
गझल |
आवश्यक ! |
ज्ञानेश. |
|
गझल |
कसा आज अंधारही सोसवेना |
प्रसाद लिमये |
|
गझल |
केवढे चालणे हे मजल दरमजल..... |
बेफिकीर |
|
गझल |
नीट वाच...! |
प्रदीप कुलकर्णी |
|
गझल |
वेडा |
व्योम |
|
गझल |
हेच असावे सत्य... |
अजय अनंत जोशी |