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मी पाहिले उजळूनही... |
विश्वस्त |
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संकेत स्थळाचे उद्घाटन |
यादगार |
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कवितेचा प्रवास-१ |
विश्वस्त |
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१ गझल: केदार पाटणकर |
विश्वस्त |
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स्वरचिन्ह उर्फ अलामत-२ |
निनावी (not verified) |
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.....असाच राहिलो |
अमेय जोशी |
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आपुलिया बळें- ४ |
विश्वस्त |
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केला खरेपणाचा नाही विचार त्यांनी |
विश्वस्त |
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शब्दास ही आज माझ्या ये लाज ती जराशी |
परमहन्स |
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एक संवाद-४ |
विश्वस्त |
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सारं दु:ख सोसलं |
महेश अवसरे |
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कशासाठी ? |
आनंद पेंढारकर |
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३ गझला : नीता भिसे |
विश्वस्त |
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पत्र-भाग १ |
निनावी (not verified) |
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करारनामे-२ |
केशवसुमार |
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सुरेश-३ |
विश्वस्त |
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आपुलिया बळें-७ |
निनावी (not verified) |
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भटसाहेब १ |
विश्वस्त |
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कर्नाटकी सत्तासोस |
अविनाश ओगले |
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एक संवाद-६ |
विश्वस्त |
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टिळा (हझल) |
कुमार जावडेकर |
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४ गझला : चंद्रशेखर सानेकर |
विश्वस्त |
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तरही गझल- कसे सावरावे |
मनीषा साधू |
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गझल - संगीता जोशी |
संपादक |
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शुभेच्छा, अभिनंदन इत्यादी |
विश्वस्त |