|
गझल |
पौर्णिमा |
चक्रपाणि |
|
गझल |
देव नव्हता तरी... |
अजय अनंत जोशी |
|
गझल |
ह्या मनाचे, दुश्मनाचे काय करावे ?.... |
खलिश |
|
गझल |
समिकरणे |
क्रान्ति |
|
गझल |
'' बरे दिसत नाही '' |
कैलास |
|
गझल |
मुद्दाम भुलवणारे |
जयन्ता५२ |
|
गझल |
पसारा... |
श्रीधर वैद्य |
|
गझल |
गझल |
अनंत ढवळे |
|
गझल |
उत्तर |
अमोल शिरसाट |
|
गझल |
भेट चोरटी... |
ज्ञानेश. |
|
गझल |
हाक |
प्रदीप कुलकर्णी |
|
गझल |
रात्री जे घडले त्याची दिवसाला वार्ता नसते |
प्रणव सदाशिव काळे |
|
गझल |
राहिले माझेतुझे नाते घसाऱ्यासारखे |
चित्तरंजन भट |
|
गझल |
...पण सुरूच आहे रहदारी ! |
प्रदीप कुलकर्णी |
|
गझल |
पालखी |
चक्रपाणि |
|
गझल |
जरासा... |
विसुनाना |
|
गझल |
जुने पेच ते..... |
बहर |
|
गझल |
ठराव नक्की मिळेल अंतर |
अजय अनंत जोशी |
|
गझल |
रित |
कैलास |
|
गझल |
मी बोचलो म्हणाले |
सोनाली जोशी |
|
गझल |
आश्चर्य काय ती ही आनंदली असावी |
मिल्या |
|
गझल |
नसतीच आसवे तर.... |
ह बा |
|
गझल |
किनारा गाठण्यासाठी |
बेफिकीर |
|
गझल |
वादळ ! |
प्रदीप कुलकर्णी |
|
गझल |
डोळ्यात अडकली स्वप्ने.. |
बहर |